
परिवार में संपत्ति का बंटवारा एक संवेदनशील मामला होता है जो अक्सर विवादों का कारण बनता है। मकान का बंटवारा कैसे होता है यह समझना हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जो पैतृक या संयुक्त संपत्ति में अपना हिस्सा चाहता है। भारत में संपत्ति विभाजन की प्रक्रिया कानूनी रूप से सुव्यवस्थित है और यह Hindu Succession Act 1956, Indian Partition Act 1893 और अन्य व्यक्तिगत कानूनों द्वारा नियंत्रित होती है। 2025 में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं जो खासकर महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करते हैं।
मकान के बंटवारे के प्रकार
मकान का बंटवारा कैसे होता है यह समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि किस तरह की संपत्ति है। पैतृक संपत्ति वह होती है जो चार पीढ़ियों से अविभाजित रूप से चली आ रही हो। इसमें बेटा, बेटी, पोता और परपोता सभी का जन्म से अधिकार होता है। 2005 के संशोधन के बाद बेटियों को भी समान अधिकार मिले हैं।
स्व-अर्जित और संयुक्त संपत्ति
स्व-अर्जित संपत्ति वह होती है जो किसी व्यक्ति ने अपनी मेहनत से खरीदी या उपहार में पाई हो। इसका बंटवारा मालिक की इच्छा पर निर्भर करता है। अगर कोई वसीयत नहीं है तो Hindu Succession Act के तहत कानूनी उत्तराधिकारियों में बंटवारा होता है। संयुक्त परिवार की संपत्ति में सभी सहदायिकों का हिस्सा होता है।
आपसी सहमति से बंटवारा
मकान का बंटवारा कैसे होता है इसका सबसे सरल तरीका है आपसी सहमति। जब सभी सह-स्वामी मिलकर फैसला लें कि संपत्ति कैसे बांटी जाए, तो यह सबसे शांतिपूर्ण तरीका होता है। इसके लिए एक विभाजन विलेख तैयार करना होता है जिसमें हर व्यक्ति का हिस्सा स्पष्ट रूप से लिखा जाता है।
विभाजन विलेख की प्रक्रिया
सबसे पहले सभी सह-स्वामियों की बैठक करें और बंटवारे पर सहमति बनाएं। एक वकील की मदद से विभाजन विलेख तैयार करें जिसमें संपत्ति का पूरा विवरण, प्रत्येक व्यक्ति का हिस्सा और शर्तें शामिल हों। यह विलेख उप-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर कराना अनिवार्य है। स्टाम्प ड्यूटी राज्य के अनुसार अलग-अलग होती है, लेकिन पारिवारिक बंटवारे में यह आमतौर पर कम होती है।
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कोर्ट के माध्यम से बंटवारा
अगर आपसी सहमति नहीं बनती तो मकान का बंटवारा कैसे होता है यह कोर्ट तय करती है। कोई भी सह-स्वामी सिविल कोर्ट में विभाजन का मुकदमा दायर कर सकता है।
विभाजन मुकदमे की प्रक्रिया
सबसे पहले एक संपत्ति कानून के विशेषज्ञ वकील से सलाह लें। सभी जरूरी दस्तावेज इकट्ठे करें जैसे टाइटल डीड, स्वामित्व के रिकॉर्ड, म्यूटेशन पेपर्स और KMC फाइलें। एक कानूनी नोटिस भेजें जिसमें बंटवारे की मांग की जानकारी हो। उचित सिविल कोर्ट में वाद दायर करें और संपत्ति की कीमत के आधार पर कोर्ट फीस जमा करें। कोर्ट सभी सह-स्वामियों को नोटिस भेजेगी।
कोर्ट की सुनवाई और फैसला
कोर्ट सभी पक्षों के दावे और सबूत सुनेगी। कुछ मामलों में कोर्ट एक कमिश्नर नियुक्त कर सकती है जो संपत्ति का निरीक्षण करके रिपोर्ट देगा। अगर संपत्ति का भौतिक बंटवारा संभव नहीं है तो कोर्ट उसे बेचने का आदेश दे सकती है और राशि को सह-स्वामियों में बांट दिया जाता है। फैसला आने पर डिक्री के अनुसार संपत्ति बांटी जाती है और रजिस्ट्रेशन अपडेट किया जाता है।
जरूरी दस्तावेज
मकान का बंटवारा कैसे होता है इसकी प्रक्रिया में सही दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हैं। टाइटल डीड जो स्वामित्व साबित करती हो, एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट जो बताता है कि संपत्ति पर कोई कर्ज या विवाद नहीं है, संपत्ति कर की रसीदें, पहचान पत्र और पते का प्रमाण सभी की जरूरत होती है। पैतृक संपत्ति के मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र और उत्तराधिकार का प्रमाण भी चाहिए।
महिलाओं के अधिकार 2025
2025 में मकान का बंटवारा कैसे होता है इसमें महिलाओं के अधिकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। 2005 के Hindu Succession Act के संशोधन के बाद बेटियों को पिता की पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिला। Supreme Court ने 2020 में Vineeta Sharma बनाम Rakesh Sharma केस में स्पष्ट किया कि यह अधिकार पूर्वव्यापी है यानी 2005 से पहले जन्मी बेटियों को भी यह अधिकार है।
विधवा और मां का हिस्सा
विधवा और माता को भी संपत्ति में हिस्सा मिलता है। हालांकि वे खुद बंटवारा नहीं मांग सकतीं, लेकिन जब बंटवारा होता है तो उन्हें भी उचित हिस्सा मिलता है। 2024 के बदलावों ने इन नियमों को और मजबूत किया है।
कौन सी संपत्ति बांटी जा सकती है
सभी प्रकार की संपत्ति का बंटवारा संभव नहीं होता। जो संपत्ति बिना उसकी कीमत घटाए बांटी जा सकती है, उसका भौतिक विभाजन किया जाता है। जैसे जमीन के बड़े टुकड़े को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है। लेकिन कुछ चीजें जैसे छोटा मकान, कुएं, सीढ़ियां, फर्नीचर, जानवर और आभूषण जैसी वस्तुओं का बंटवारा संभव नहीं होता क्योंकि उन्हें बांटने से उनकी कीमत खत्म हो जाएगी। ऐसे मामलों में इन चीजों को बेचकर राशि बांटी जाती है।
पारिवारिक मंदिर और धार्मिक स्थल
परिवार के मंदिर, धार्मिक स्थल और मूर्तियों को न तो बांटा जाता है और न ही बेचा जाता है। इनकी देखभाल परिवार के सबसे वरिष्ठ या सबसे धार्मिक सदस्य को दी जाती है। बाकी सदस्यों को उचित समय पर पूजा करने की छूट रहती है।
बंटवारे की समय सीमा
विभाजन के मुकदमे के लिए कोई समय सीमा नहीं है। आप किसी भी समय बंटवारे की मांग कर सकते हैं। लेकिन जितनी जल्दी यह प्रक्रिया शुरू की जाए, उतना बेहतर है क्योंकि लंबे समय तक विवाद चलने से रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती है। कोर्ट में मुकदमे में कई महीनों से लेकर कुछ सालों तक का समय लग सकता है। यह मामले की जटिलता और कोर्ट की भीड़ पर निर्भर करता है।
बंटवारे के बाद की प्रक्रिया
मकान का बंटवारा कैसे होता है यह समझने के साथ यह भी जानना जरूरी है कि बंटवारे के बाद क्या करना होता है। डिक्री मिलने के बाद नए स्वामित्व का रजिस्ट्रेशन कराना होता है। म्यूटेशन करवाना जरूरी है ताकि सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम अपडेट हो जाए। West Bengal जैसे राज्यों में e-Nathikaran पोर्टल पर ऑनलाइन म्यूटेशन की सुविधा है जो May 2025 में अपडेट हुई।
नए दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन
Sale Deed या Partition Deed तैयार करनी होती है। नए खाता नंबर और दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूरी करें। संपत्ति कर का भुगतान अपने हिस्से के अनुसार शुरू करें। बिजली, पानी और अन्य कनेक्शन अपने नाम पर ट्रांसफर कराएं।
आधुनिक विकल्प और मध्यस्थता
2025 में Supreme Court ने विवादों को सुलझाने के लिए Alternative Dispute Resolution (ADR) के उपयोग की सिफारिश की है। मध्यस्थता से समय और पैसे दोनों की बचत होती है। कई शहरों में मीडिएशन सेंटर हैं जहां तटस्थ व्यक्ति दोनों पक्षों को समझौता करने में मदद करते हैं। यह प्रक्रिया कोर्ट से तेज और कम महंगी होती है।
नाबालिग का हिस्सा
अगर परिवार में नाबालिग बच्चे हैं तो उनका भी बंटवारे में पूरा हक है। उनकी तरफ से कानूनी अभिभावक या माता-पिता दावा कर सकते हैं। नाबालिग की संपत्ति को उसके बालिग होने तक सुरक्षित रखा जाता है।
वकील की भूमिका
मकान का बंटवारा कैसे होता है इस प्रक्रिया में एक अनुभवी संपत्ति वकील की मदद बेहद जरूरी है। वकील टाइटल और स्वामित्व रिकॉर्ड की पुष्टि करता है, विभाजन विलेख तैयार करता है, कोर्ट में आपका प्रतिनिधित्व करता है और कानूनी नोटिस का जवाब संभालता है। अच्छा वकील गैरकानूनी कब्जे और अतिक्रमण से भी बचाता है। Delhi, Mumbai, Kolkata, Bangalore जैसे बड़े शहरों में विशेषज्ञ संपत्ति वकील आसानी से मिल जाते हैं।
FAQs
1. क्या बेटी को पैतृक संपत्ति में बराबर का हिस्सा मिलता है?
हां, 2005 के संशोधन के बाद बेटी को पिता की पैतृक संपत्ति में बेटे के बराबर अधिकार है। Supreme Court ने 2020 में यह स्पष्ट किया कि यह अधिकार 2005 से पहले जन्मी बेटियों पर भी लागू होता है।


